Online Gaming में Cryptocurrency की एंट्री: भारत में नया ‘डिजिटल जुआ’ मॉडल या कानूनी चुनौती

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अगर आप सोचते हैं कि ऑनलाइन गेमिंग सिर्फ मोबाइल पर खेलने भर तक सीमित है, तो अब कहानी कुछ और है। भारत में Online Gaming की दुनिया तेजी से बदल रही है और इसकी वजह है Cryptocurrency। हाल के महीनों में कई भारतीय खिलाड़ी पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बचने के लिए अब Crypto payments का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये खिलाड़ी कुराकाओ (Curacao) जैसे ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स पर Poker, Rummy, क्रिकेट और फुटबॉल जैसे गेम्स में दांव लगाते हैं। कारण साफ है बैंकिंग निगरानी से बचना और ट्रांजेक्शन ट्रेल मिटाना आसान हो गया है। पहले जहां RMG (Real Money Gaming) में सीधा कैश इस्तेमाल होता था, अब वही लेन-देन डिजिटल करेंसी से हो रहा है।

भारत में बढ़ता ट्रेंड: खिलाड़ी क्यों ले रहे हैं क्रिप्टो का सहारा

Online Gaming पर बढ़ते सरकारी प्रतिबंधों और बैंकों की सख्ती के कारण, भारतीय खिलाड़ी अब वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं। खासकर बड़े दांव लगाने वाले खिलाड़ी, जो आसानी से Crypto coins खरीद सकते हैं, अब इन्हीं के जरिए खेलना पसंद करते हैं।
टेक्नोलॉजी लॉयर जय सैता के मुताबिक, विदेशी Crypto wallets के जरिए भुगतान और निकासी करने से इन ट्रांजेक्शन्स को ट्रैक करना लगभग नामुमकिन है। इससे Money Laundering और टैक्स चोरी का खतरा बढ़ गया है।

दरअसल, Online Gaming Regulation Act 2025 के बाद जब कई भारतीय RMG प्लेटफॉर्म्स ने ऑपरेशन रोक दिए, तब विदेशी वेबसाइट्स ने आक्रामक तरीके से भारतीय यूज़र्स को टारगेट करना शुरू किया। इससे Crypto Gaming का चलन और तेज़ी से फैल गया।

कुराकाओ बना क्रिप्टो कैसिनो का हब

नीदरलैंड्स के अधीन आने वाला छोटा सा द्वीप Curacao अब क्रिप्टो कैसिनो कंपनियों के लिए सबसे पसंदीदा ठिकाना बन गया है। यहां का “सस्ता और तेज़ लाइसेंसिंग सिस्टम विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। हालांकि, ये प्लेटफॉर्म अपने स्थानीय कानूनों के तहत काम करते हैं, लेकिन भारत में इनकी स्थिति कानूनी रूप से Grey Area में है। इस वजह से भारतीय खिलाड़ियों के लिए यहां खेलना एक तरह से “नियमों से बचने का आसान रास्ता बन गया है।

ब्लैक मार्केट में चल रहा USDT का कारोबार

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क्रिप्टो दुनिया में USDT (Tether) सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला स्टेबलकॉइन है। लेकिन भारत में खिलाड़ी इसे ज्यादातर ब्लैक मार्केट से खरीद रहे हैं। एक क्रिप्टो एक्सचेंज अधिकारी बताते हैं कि जैसे हवालातंत्र विदेशी मुद्रा में काम करता है, वैसे ही क्रिप्टो के लिए भी एक समानांतर काला बाजार मौजूद है।

खिलाड़ी नकद देकर क्रिप्टो खरीदते हैं और फिर उसे निजी वॉलेट्स में ट्रांसफर करते हैं। यह तरीका ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग से बचने का रास्ता बन गया है। हालांकि, Indian crypto exchanges से सीधे प्राइवेट वॉलेट में पैसा निकालना मुश्किल है क्योंकि ऐसे ट्रांजेक्शन्स FIU (Financial Intelligence Unit) को रिपोर्ट किए जाते हैं।

समाधान क्या है? सरकार के सामने चुनौती

जय सैता का मानना है कि पूर्ण प्रतिबंध की नीति अब काम नहीं कर रही। उन्होंने कहा, सरकार को स्किल-बेस्ड गेम्स के लिए नियामक ढांचा तैयार करना चाहिए ताकि ऐसे ट्रांजेक्शन्स को टैक्स किया जा सके और मनी लॉन्ड्रिंग के खतरे कम हों।
अगर Online Gaming को नियंत्रित तरीके से खोला जाए, तो यह एक बड़े डिजिटल उद्योग के रूप में उभर सकता है। लेकिन फिलहाल, भारत में क्रिप्टोकरेंसी और रियल मनी गेमिंग के इस मिश्रण ने एक जटिल कानूनी और आर्थिक सवाल खड़ा कर दिया है।

Disclaimer:
इस लेख का उद्देश्य केवल जानकारी देना है। इसमें बताई गई बातें किसी भी तरह की सट्टेबाजी, ऑनलाइन जुआ या क्रिप्टो निवेश को बढ़ावा देने के लिए नहीं हैं। कृपया किसी भी वित्तीय या गेमिंग निर्णय से पहले संबंधित कानूनों और विशेषज्ञों की सलाह लें।

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