मद्रास हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब Cryptocurrency मानी जाएगी भारत में संपत्ति निवेशकों को मिली बड़ी राहत

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सोचिए, अगर आपने सालों पहले क्रिप्टो में निवेश किया होता और अब कोई कहे कि वह आपकी कानूनी संपत्ति नहीं है, तो कैसा लगता? लेकिन अब राहत की खबर है। मद्रास हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है भारत में Cryptocurrency को संपत्ति Property के रूप में मान्यता दी जाएगी। यह फैसला न केवल निवेशकों के लिए बड़ी राहत है, बल्कि भारत में डिजिटल एसेट्स के भविष्य को नई दिशा देने वाला कदम भी है।

क्रिप्टोकरेंसी को अब ‘संपत्ति’ माना जाएगा

मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश की सिंगल-जज बेंच ने यह साफ किया कि क्रिप्टोकरेंसी कोई मुद्रा नहीं, बल्कि संपत्ति का रूप है। अदालत ने कहा, यह भले ही भौतिक रूप में मौजूद नहीं है, लेकिन इसका मूल्य है और इसे स्वामित्व में रखा जा सकता है। इसका अर्थ यह हुआ कि अब Cryptocurrency को खरीदा, बेचा, इस्तेमाल और ट्रस्ट में रखा जा सकता है।

कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने मामलों जैसे Ahmed G.H. Ariff vs. CWT और Jilubhai Nanbhai Khachar vs. State of Gujarat का हवाला देते हुए कहा कि संपत्ति का अर्थ केवल जमीन या सोना-चांदी नहीं, बल्कि ऐसे सभी मूल्यवान अधिकारों से है जिनका विनिमय मूल्य हो।

यह भी कहा गया कि क्रिप्टो अब Income Tax Act 1961 की धारा 2(47A) के तहत Virtual Digital Asset की परिभाषा में आती है, और इसे सट्टा लेनदेन नहीं कहा जा सकता।

न्यूजीलैंड और अन्य देशों से ली प्रेरणा

मद्रास हाईकोर्ट ने इस फैसले में विदेशी न्यायिक मिसालों का भी उल्लेख किया। न्यूजीलैंड हाईकोर्ट के Ruscoe vs. Cryptopia Ltd (2020) मामले में भी माना गया था कि क्रिप्टोकरेंसी अमूर्त संपत्ति intangible property है जिसे ट्रस्ट में रखा जा सकता है। इसी तरह, ब्रिटेन के AA vs. Persons Unknown (2019), सिंगापुर के ByBit Fintech Ltd v. Ho Kai Xin (2023), और अमेरिका के SEC vs. Ripple Labs (2023) मामलों में भी क्रिप्टो को संपत्ति या कमोडिटी माना गया है। यानी अब वैश्विक स्तर पर भी यह मान्यता मिल रही है कि Cryptocurrency एक वैध संपत्ति है।

किस मामले में आया यह फैसला

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यह फैसला एक खास याचिका के बाद आया जिसमें एक व्यक्ति ने WazirX प्लेटफॉर्म पर अपने 3,532.30 XRP (Ripple Coin) की सुरक्षा मांगी थी। साल 2024 में हुए एक साइबर हमले के बाद ये कॉइन फ्रीज कर दिए गए थे। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि यह व्यक्ति उन कॉइनों का वैध स्वामी है और जब तक मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी नहीं होती, कोई भी उन पर दावा नहीं कर सकता।
इससे यह स्पष्ट हुआ कि डिजिटल एसेट्स पर स्वामित्व अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे, जैसे किसी जमीन या शेयर पर रहते हैं।

भारत के लिए इस फैसले के मायने

यह फैसला भारत में क्रिप्टो निवेशकों और स्टार्टअप्स दोनों के लिए बड़ी जीत है। अब जब अदालत ने इसे संपत्ति घोषित कर दिया है, तो इससे टैक्सेशन, विरासत, दिवालियापन और डिजिटल संपत्ति से जुड़े कानूनों में स्पष्टता आएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब एक ऐसा नियामक ढांचा तैयार कर सकता है जो नवाचार को बढ़ावा दे और उपभोक्ताओं की सुरक्षा भी करे। यह कदम उन लाखों भारतीय निवेशकों के लिए विश्वास का प्रतीक है जो अब तक कानूनी अस्पष्टता के कारण असमंजस में थे।

भविष्य में क्या हो सकता है

कानूनी मान्यता मिलने के बाद भारत में Cryptocurrency को लेकर नीति निर्माण तेज हो सकता है। सरकार डिजिटल एसेट टैक्सेशन में बदलाव कर सकती है और RBI को भी एक नियंत्रित ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा, यह फैसला उन मामलों में भी मिसाल बनेगा जहां साइबर अपराध या एक्सचेंज विवादों में डिजिटल संपत्ति के स्वामित्व पर सवाल उठता है।

Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी कानूनी या निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश या कानूनी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की राय अवश्य लें।

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