भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर टैक्सेशन को लेकर लगातार बदलाव हो रहे हैं। 8 अक्टूबर 2025 को वित्त मंत्रालय ने एक बार फिर संकेत दिए हैं कि Tax on Cryptocurrency को लेकर और कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं। सरकार का मानना है कि क्रिप्टो ट्रेडिंग अब केवल वर्चुअल गेमिंग नहीं, बल्कि एक बड़ा निवेश साधन बन चुका है इसलिए इसे रेगुलेटेड टैक्स सिस्टम में लाना जरूरी है।
इस खबर के बाद निवेशकों में हलचल बढ़ गई है। कई एक्सपर्ट्स जैसे CA Nitin Kaushik का मानना है कि भारत को अब डिजिटल एसेट टैक्सेशन पर क्लियर और स्टेबल पॉलिसी की ज़रूरत है, ताकि निवेशक निश्चिंत होकर ट्रेड कर सकें।
क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स कैसे लगता है?
भारत में फिलहाल क्रिप्टो को Virtual Digital Asset (VDA) कैटेगरी में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि जब आप किसी क्रिप्टो को बेचकर मुनाफा कमाते हैं, तो वह कैपिटल गेन माना जाता है। इस पर 30% टैक्स लागू है बिलकुल वैसे ही जैसे लॉटरी या गेमिंग इनकम पर लगता है।
लेकिन एक खास बात ध्यान देने योग्य है अगर आप cryptocurrency को होल्ड करते हैं और फिर बेचते हैं, तो उस पर लॉन्ग-टर्म या शॉर्ट-टर्म गेन के हिसाब से टैक्स देना पड़ सकता है। यानी जितना ज्यादा समय आप कॉइन को अपने पास रखते हैं, टैक्स का कैलकुलेशन उसी हिसाब से होगा।
TDS on Cryptocurrency: हर ट्रांजैक्शन पर 1% कटौती
2022 में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कहा कि हर क्रिप्टो ट्रांजैक्शन पर 1% TDS (Tax Deducted at Source) लगेगा।
इसका मतलब है कि जब भी आप किसी एक्सचेंज से क्रिप्टो खरीदते या बेचते हैं, तो प्लेटफॉर्म अपने आप आपकी राशि से 1% टैक्स काट लेगा और सरकार को जमा करेगा।
यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि सरकार को पता चल सके कि कितने लोग investment in cryptocurrency कर रहे हैं और किस स्केल पर। हालांकि इससे ट्रेडर्स को दिक्कत भी हुई क्योंकि हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए यह टैक्स रेट ज्यादा साबित हो रहा है।
निवेश से पहले जानें किन बातों का रखें ध्यान

अगर आप क्रिप्टोकरेंसी में निवेश (investment in cryptocurrency) करने जा रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है —
- हमेशा KYC-verified प्लेटफॉर्म पर ही ट्रेड करें।
- अपने हर ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड रखें ताकि टैक्स फाइलिंग के समय परेशानी न हो।
- लॉन्ग टर्म होल्डिंग और शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के बीच फर्क समझें।
- एक्सपर्ट जैसे सीए नितिन कौशिक से टैक्स प्लानिंग पर सलाह लें।
भारत में फिलहाल RBI या SEBI की ओर से क्रिप्टो को लीगल करेंसी नहीं माना गया है, लेकिन टैक्सेशन के तहत यह पूरी तरह मॉनिटर किया जा रहा है।
सरकार का रुख: रेगुलेशन और पारदर्शिता की ओर
भारत सरकार का कहना है कि क्रिप्टो पर बैन लगाने की बजाय उसे मॉनिटर करना ज्यादा बेहतर है। वित्त मंत्रालय और CBDT लगातार ऐसे डेटा इकट्ठा कर रहे हैं जिससे टैक्स चोरी या गैरकानूनी लेनदेन पर रोक लगाई जा सके।
क्रिप्टोकरेंसी पर टीडीएस (TDS on Cryptocurrency) लागू होने के बाद सरकार को करोड़ों रुपये का टैक्स राजस्व मिल चुका है।
अब चर्चा है कि सरकार जल्द ही क्रिप्टो टैक्स फाइलिंग पोर्टल भी लॉन्च कर सकती है, जिससे निवेशकों को आसानी से अपने टैक्स रिटर्न भरने का विकल्प मिलेगा।
क्या भविष्य में क्रिप्टो टैक्स स्लैब बदलेगा?
अभी सरकार 30% टैक्स रेट को बरकरार रखे हुए है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह रेट घटाया जा सकता है ताकि ज्यादा लोग डिजिटल एसेट्स में निवेश करें।
भारत में 2025 में लगभग 2.3 करोड़ क्रिप्टो निवेशक हैं, और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसलिए उम्मीद है कि सरकार आने वाले बजट में क्रिप्टो निवेशकों को राहत दे सकती है खासकर उन लोगों को जो लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं।
एक्सपर्ट की राय: टैक्स अवेयरनेस ही बचाव है
CA Nitin Kaushik का कहना है कि टैक्स की जानकारी न होने से कई निवेशक फाइनेंशियल लॉस झेलते हैं। अगर आप हर ट्रांजैक्शन पर सही टैक्स भरते हैं, तो न सिर्फ पेनल्टी से बच सकते हैं बल्कि अपनी कमाई को लीगल भी रख सकते हैं।
उनके अनुसार, भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स देना अब जरूरी हो गया है। निवेशक को चाहिए कि वह अपने CA से सलाह लेकर हर ट्रेड का हिसाब रखे, ताकि आने वाले समय में किसी नोटिस या जांच से बचा जा सके।
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